इज़राइल ने शनिवार को ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। हमले के तुरंत बाद इज़राइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। यह घोषणा ऐसे समय की गई जब ईरान की राजधानी Tehran के डाउनटाउन इलाके में जोरदार धमाके के बाद आसमान में घना धुआं उठता देखा गया। ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने विस्फोट की पुष्टि की, हालांकि उसने हमले की प्रकृति और नुकसान को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
उधर, इज़राइल में अचानक सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की हिदायत दी गई। इज़राइली सेना ने बयान जारी कर कहा कि ईरान की ओर से संभावित मिसाइल हमले की आशंका को देखते हुए एहतियातन अलर्ट जारी किया गया है। सेना के मुताबिक, नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और देश की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और भड़का दिया है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही ताज़ा वार्ता पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि वह वार्ता की प्रगति से खुश नहीं हैं, लेकिन फिर भी वह बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहते। जिनेवा में अमेरिकी दूतों और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता बेनतीजा रही थी, जिसके एक दिन बाद ट्रंप का यह बयान सामने आया।
क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं की तैनाती पहले से ही बढ़ी हुई है, और ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान व्यापक परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यूरेनियम संवर्धन का अधिकार प्राप्त है। तेहरान ने बार-बार इस बात से इनकार किया है कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
इज़राइल के ताजा हमले और संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका ने पूरे पश्चिम एशिया को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास स्थिति को नियंत्रित कर पाएंगे या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
