देहरादून : उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व फूलदेई के अवसर पर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री **रेखा आर्या** ने अपने राजकीय आवास पर कुर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद के कार्यकर्ताओं तथा नन्हे बच्चों के साथ पूरे उत्साह और उल्लास के साथ यह पर्व मनाया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने घर की देहरी पर रंग-बिरंगे फूल अर्पित कर प्रदेश की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत किया और फूलदेई की खुशियां साझा कीं। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और उमंग साफ झलक रही थी। उन्होंने पारंपरिक अंदाज में फूल अर्पित कर घर-घर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान वातावरण लोकगीतों और पर्व की सांस्कृतिक झलकियों से सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर मंत्री रेखा आर्या ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि फूलदेई केवल एक पर्व नहीं बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व “सर्वे भवंतु सुखिनः” की भावना को आत्मसात करते हुए समाज में प्रेम, भाईचारे और खुशहाली का संदेश देता है। सदियों से उत्तराखंड के गांवों में मनाया जाने वाला यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोक पर्व हमारी संस्कृति को जीवित रखने के साथ-साथ समाज को एकजुट भी करते हैं।
मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है और फूलदेई इसका एक सुंदर उदाहरण है। इस पर्व में बच्चे घर-घर जाकर देहरी पर फूल सजाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें पर्यावरण संरक्षण के महत्व की भी याद दिलाती है।
उन्होंने आगे कहा कि आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में फूलदेई जैसे पर्व हमें प्रकृति के करीब आने और उसके संरक्षण का संदेश देते हैं। पर्व के माध्यम से समाज को यह सीख मिलती है कि फूल-पौधों, पेड़ों और प्रकृति के अन्य संसाधनों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोक पर्वों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है और यही परंपरा हमारी पहचान भी है।
रेखा आर्या ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नई पीढ़ी इन परंपराओं को समझे और आगे बढ़ाए। यदि बच्चे अपनी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ेंगे, तो भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि फूलदेई का पर्व हमें सकारात्मक सोच, सामूहिकता और प्रकृति प्रेम का संदेश देता है, जिसे समाज में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ फूलदेई पर्व की परंपराओं को निभाया। बच्चों ने घर की देहरी पर फूल बिखेरते हुए खुशहाली और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में कुर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद की केंद्रीय सांस्कृतिक सचिव **बबीता साह लोहनी** सहित कई बच्चे उपस्थित रहे। इनमें गुनगुन, नायरा, समृद्धि, दिव्यांशी, शिवन्या, पीहु, आराध्या, प्राची, नेहा, गीतेश, राघव, शानवी और आरण्या प्रमुख रूप से शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी गईं तथा इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों को आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया।
