देहरादून : पावन रामनवमी के शुभ अवसर पर एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ कन्या पूजन का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने देवी स्वरूप मानी जाने वाली छोटी बालिकाओं का पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजन कर बालिकाओं के चरण स्पर्श किए, उन्हें भोजन कराया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया, जो भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान और पूजन का प्रतीक माना जाता है।
इस पावन दिन पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हम सभी के लिए आदर्शों की एक महान प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन कर्तव्यनिष्ठा, सत्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने मूल्यों और सिद्धांतों से विचलित नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि श्रीराम के आदर्श आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने प्राचीन काल में थे, और समाज को सही दिशा देने में उनकी शिक्षाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी प्रदेशवासियों का जीवन सुख, समृद्धि और खुशहाली से परिपूर्ण रहे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य निरंतर विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे और हर व्यक्ति के जीवन में शांति और संतोष बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर नैतिक मूल्यों, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रति आस्था को और अधिक मजबूत करता है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन की परंपरा के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है, जो समाज में नारी सम्मान और समानता का संदेश देती है। कन्या पूजन के माध्यम से हम यह दर्शाते हैं कि नारी केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला है और उनके सम्मान के बिना एक स्वस्थ और समृद्ध समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने एक बार फिर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए सभी को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं और लोगों से अपील की कि वे इस पावन अवसर पर अपने जीवन में सकारात्मकता, सद्भाव और आदर्शों को अपनाएं, जिससे समाज में एकता और भाईचारे की भावना और अधिक मजबूत हो सके।
