जनगणना 2027 में जहां एक ओर डिजिटल तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर लिव-इन संबंधों को विवाहित श्रेणी में शामिल करने जैसे फैसले समाज के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं। यह जनगणना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है।
नई दिल्ली: जनगणना 2027 को लेकर सरकार इस बार तकनीकी सुधारों के साथ-साथ बदलती सामाजिक संरचनाओं को भी शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसमें लिव-इन संबंधों को लेकर स्पष्टता दी गई है।
लिव-इन संबंधों को लेकर नई स्पष्टता
मौजूद जानकारी के अनुसार, अब साथ रह रहे यानी लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़े यदि अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह कदम समाज में बदलते रिश्तों की वास्तविकता को आंकड़ों में शामिल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
डिजिटल जनगणना से प्रक्रिया होगी आसान
इस बार जनगणना में डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया जाएगा। नागरिक स्व-गणना पोर्टल के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक बनेगी।
डेटा की गोपनीयता पर खास ध्यान
सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। इसके लिए आधुनिक साइबर सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा बना रहे।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
जनगणना प्रक्रिया में इस बार रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे हर स्तर पर काम की निगरानी की जा सकेगी और किसी भी गड़बड़ी को तुरंत सुधारा जा सकेगा।
प्रशिक्षित गणनाकर्मी करेंगे सत्यापन
स्व-गणना के बाद गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि डेटा पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय रहे।
