(सलीम रज़ा पत्रकार}
विश्व पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है दरअसल यह दिन हम सभी को हमारी धरती के महत्व को समझने का मौका देता है। यह केवल एक तारीख ही नहीं वल्कि एक ऐसा संदेश है जो हमें यह याद दिलाता है कि हमारा वजूद पूरी तरह से पृथ्वी पर निर्भर है। हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं, जो पानी पी रहे हैं, जो भोजन कर रहे हैं,सब कुछ हमें इसी धरती से मिलता है। इसलिए इस दिन का मकसद लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना है।
आज के समय में पृथ्वी कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। सबसे बड़ी समस्या है प्रदूषण। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण ने जीवन को कठिन बना दिया है। शहरों में हवा इतनी खराब हो गई है कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। नदियां और झीलें गंदगी और रसायनों से भर गई हैं, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। खेतों की मिट्टी भी रसायनों के कारण अपनी उर्वरता खोती जा रही है। यह सब हमारे ही कार्यों का परिणाम है।
जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। मौसम के पैटर्न बदल रहे हैंए कहीं अत्यधिक गर्मी पड़ रही है तो कहीं असामान्य बारिश हो रही है। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं। इन सबका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है। अगर हमने अभी से कदम नहीं उठाएए तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
जंगलों की कटाई भी एक गंभीर समस्या है। पेड़ हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वे हमें ऑक्सीजन देते हैंए वातावरण को ठंडा रखते हैं और जीव.जंतुओं का घर होते हैं। लेकिन तेजी से हो रही वनों की कटाई ने पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ दिया है। कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं और जैव विविधता खतरे में पड़ गई है। पेड़ों की कमी के कारण मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है और भूमि बंजर होती जा रही है।
इन समस्याओं के पीछे मुख्य कारण है मानव की बढ़ती जरूरतें और लापरवाही। हमने विकास के नाम पर प्रकृति का अत्यधिक दोहन किया है। हमने यह नहीं सोचा कि हमारे हर कदम का असर पर्यावरण पर पड़ता है। अब समय आ गया है कि हम अपने कार्यों के परिणामों को समझें और अपने व्यवहार में बदलाव लाएं।
पृथ्वी दिवस हमें यही सिखाता है कि हम अपने जीवन में छोटे.छोटे बदलाव करके भी बड़ा असर डाल सकते हैं। जैसे हम प्लास्टिक का कम उपयोग कर सकते हैं। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है और यह आसानी से नष्ट नहीं होता। इसके बजाय हम कपड़े या जूट के बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह हम पानी की बचत कर सकते हैं। नल को खुला छोड़ने की आदत को बदलकर हम बहुत सारा पानी बचा सकते हैं।
ऊर्जा की बचत भी बहुत जरूरी है। हमें अनावश्यक रूप से बिजली का उपयोग नहीं करना चाहिए। जब जरूरत न होए तो लाइट और पंखे बंद कर देने चाहिए। इसके अलावा हमें सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को अपनाना चाहिए। ये पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं और लंबे समय तक उपयोगी भी हैं।
कचरे का सही प्रबंधन भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमें अपने कचरे को अलग.अलग करना चाहिएकृगीला और सूखा कचरा अलग रखना चाहिए। इससे कचरे का पुनर्चक्रण आसान हो जाता है और प्रदूषण कम होता है। हमें यह समझना होगा कि कचरा केवल फेंक देने की चीज नहीं हैए बल्कि उसे सही तरीके से संभालना हमारी जिम्मेदारी है।
पेड़ लगाना सबसे सरल और प्रभावी उपायों में से एक है। हर व्यक्ति अगर अपने जीवन में कुछ पेड़ लगाए और उनकी देखभाल करेए तो हम पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। पेड़ न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैंए बल्कि वे वातावरण को भी स्वच्छ बनाते हैं और जलवायु को संतुलित रखते हैं।
शिक्षा भी इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण है। अगर बच्चों को शुरू से ही पर्यावरण के महत्व के बारे में बताया जाएए तो वे भविष्य में अधिक जागरूक नागरिक बनेंगे। स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। बच्चों को केवल किताबों में ही नहींए बल्कि व्यवहार में भी पर्यावरण संरक्षण सिखाया जाना चाहिए।
समाज में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है। हमें अपने आसपास के लोगों को भी पर्यावरण के प्रति सचेत करना चाहिए। अगर हर व्यक्ति अपने परिवार और दोस्तों को इस बारे में बताएए तो यह संदेश तेजी से फैल सकता है। सामाजिक अभियान और कार्यक्रम भी इस दिशा में मददगार साबित हो सकते हैं।
सरकारों की भी इस दिशा में बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें ऐसे नियम और कानून बनाने चाहिए जो पर्यावरण की रक्षा करें। उद्योगों को भी अपने कार्यों में पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें स्वच्छ तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
लेकिन केवल सरकार या किसी एक संस्था के प्रयास से यह समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी केवल हमारे लिए नहीं हैए बल्कि यह सभी जीव.जंतुओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है।
पृथ्वी दिवस हमें यह भी सिखाता है कि हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए। हमें विकास करना हैए लेकिन ऐसा विकास जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। हमें अपनी जरूरतों और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना होगा।
आज के समय में तकनीक भी पर्यावरण संरक्षण में मदद कर सकती है। नई.नई तकनीकों के माध्यम से हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं और संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। जैसे इलेक्ट्रिक वाहनए सोलर पैनल और रीसाइक्लिंग तकनीकें। हमें इनका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।
अगर हम अपने जीवन में इन बातों को अपनाएंए तो हम पृथ्वी को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि हम बहुत बड़े कदम उठाएं। छोटे.छोटे प्रयास भी मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हर व्यक्ति का प्रयास महत्वपूर्ण है।
अंत मेंए यह कहना गलत नहीं होगा कि पृथ्वी हमारी सबसे अनमोल धरोहर है। इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है। अगर हम आज जागरूक नहीं हुएए तो कल बहुत देर हो जाएगी। हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है।
पृथ्वी दिवस केवल एक दिन नहीं हैए बल्कि यह एक सोच हैए एक जिम्मेदारी है। हमें हर दिन को पृथ्वी दिवस की तरह जीना चाहिए। हमें अपने हर कार्य में पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षितए स्वच्छ और सुंदर पृथ्वी दे पाएंगे।

