नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के संकेत दिखाई देने लगे हैं, जहां हाल ही में बनी बालेन शाह की सरकार को शुरुआती दिनों में ही भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 में सत्ता संभालने के बाद से ही सरकार कई विवादित फैसलों के कारण आलोचनाओं के घेरे में आ गई है और देशभर में जनता, खासकर युवाओं और छात्रों का गुस्सा सड़कों पर नजर आने लगा है।
राजधानी काठमांडू से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। जिस जनआंदोलन और खासतौर पर जेन-ज़ेड के समर्थन से बालेन शाह सत्ता में आए थे, अब वही वर्ग उनके खिलाफ लामबंद होता दिख रहा है। छात्र संगठनों को भंग करने के फैसले ने इस नाराजगी को और बढ़ा दिया है। छात्रों का कहना है कि यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है, जिसके चलते विश्वविद्यालयों और सड़कों पर विरोध तेज हो गया है।
सरकार के एक अन्य फैसले ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान लाने पर सख्त कस्टम नियम लागू करने और ड्यूटी अनिवार्य करने के निर्णय से व्यापारियों और आम नागरिकों में असंतोष फैल गया है। भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोग इस फैसले को अपने रोजमर्रा के जीवन पर सीधा असर डालने वाला मान रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
वहीं सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला एक और बड़ा मुद्दा गृह मंत्री सुदन गुरंग पर लगे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इन आरोपों के चलते सरकार की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों के साथ-साथ आम नागरिक भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थिति यह है कि विरोध सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद के अंदर भी सरकार के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं। जनता के बीच बढ़ती नाराजगी, छात्रों का आंदोलन, आर्थिक फैसलों से उपजा असंतोष और भ्रष्टाचार के आरोप—इन सभी ने मिलकर सरकार के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक महीने के भीतर ही इस तरह का व्यापक विरोध यह संकेत दे रहा है कि अगर हालात नहीं संभाले गए, तो नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक बदलाव की स्थिति बन सकती है।
शनिवार देर रात एक हृदयविदारक सड़क हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया, जब बेटी की शादी संपन्न कर खुशी-खुशी घर लौट रहे लोगों की यात्रा अचानक मातम में बदल गई। यह दर्दनाक दुर्घटना दोहरीघाट थाना क्षेत्र के कुसुम्हा बशारतपुर के पास गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पर हुई, जहां तेज रफ्तार स्कार्पियो अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराई और फिर दूसरी लेन में जाकर सामने से आ रहे एक भारी ट्रेलर से भिड़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही पांच लोगों की जान चली गई, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल थे, जिससे इस हादसे की त्रासदी और भी गहरी हो गई। जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर जिले के खोराबार थाना क्षेत्र के रानीडीहा निवासी 60 वर्षीय विनय श्रीवास्तव अपनी बेटी की शादी के लिए रांची गए हुए थे। शादी की सभी रस्में सकुशल पूरी होने के बाद परिवार खुशी-खुशी अपने घर लौट रहा था। उनके साथ उनकी पत्नी अर्चना श्रीवास्तव (58) और इकलौते बेटे कृतार्थ श्रीवास्तव (27) भी मौजूद थे। इस सफर में उनके साथ वाहन चालक बिहार के गया निवासी पुरुषोत्तम (47) और दूसरा चालक नितीश (46) भी थे, जो पीछे की सीट पर बैठा हुआ था। परिवार के साथ उनका पालतू कुत्ता भी था, जो इस हादसे में नहीं बच सका।
बताया जा रहा है कि देर रात सड़क अपेक्षाकृत खाली थी और वाहन तेज गति से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे स्कार्पियो डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर के बाद वाहन उछलकर दूसरी लेन में जा पहुंचा, जहां सामने से आ रहे ट्रेलर से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक पांचों की मौत हो चुकी थी। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और मृतकों के परिजनों को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, घर में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ ही घंटों पहले शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज गति के खतरों को उजागर कर दिया है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर कब तक ऐसी लापरवाहियां लोगों की जान लेती रहेंगी।
