देहरादून : चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गणना प्रपत्र में मतदाताओं द्वारा दी गई जानकारी का वर्ष 2003 की मतदाता सूची के डेटाबेस से मिलान किया जाएगा। यदि किसी मतदाता का विवरण उपलब्ध नहीं होता है या दर्ज जानकारी डेटाबेस से मेल नहीं खाती है, तो संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद मतदाता को अपनी नागरिकता, जन्मतिथि और जन्म स्थान से जुड़े वैध दस्तावेज जमा करने होंगे। कई मामलों में माता-पिता के दस्तावेज भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
राज्य में आठ जून से शुरू होने वाले इस अभियान के लिए जिला स्तर पर बीएलओ का प्रशिक्षण जारी है। आठ जून से बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाएंगे और मतदाताओं से आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
दस्तावेजों की मांग मतदाता की जन्मतिथि के आधार पर तीन श्रेणियों में की जाएगी। एक जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि और जन्म स्थान प्रमाणित करने वाला कोई एक वैध दस्तावेज देना होगा। एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को अपने साथ-साथ माता या पिता में से किसी एक की जन्मतिथि और जन्म स्थान संबंधी प्रमाण भी देना होगा। वहीं दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को स्वयं तथा माता-पिता दोनों के जन्म संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यदि माता या पिता में से कोई भारतीय नागरिक नहीं है, तो उनके वैध पासपोर्ट और वीजा की प्रति भी जमा करनी होगी।
आयोग ने मतदाता, माता और पिता के लिए अलग-अलग स्व-प्रमाणित दस्तावेज स्वीकार करने की व्यवस्था की है। मान्य दस्तावेजों में केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों अथवा पेंशनभोगियों को जारी पहचान पत्र, एक जुलाई 1987 से पहले सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, बैंकों, डाकघरों, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, वैध पासपोर्ट, दसवीं की अंकतालिका या प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, ओबीसी, एससी, एसटी अथवा अन्य जाति प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े दस्तावेज, परिवार रजिस्टर, सरकारी भूमि या मकान आवंटन पत्र तथा आधार कार्ड शामिल हैं।
