देहरादून: प्रदेश में शिक्षकों की एसआईआर ड्यूटी को लेकर गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। कई शिक्षकों की ड्यूटी उनके कार्यस्थल से 50 से 60 किलोमीटर दूर लगाई गई है, जबकि कुछ मामलों में एक ही शिक्षक या शिक्षिका को दो से तीन अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर दिया गया है। इससे शिक्षकों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि उन्हें किस स्थान पर अपनी जिम्मेदारी निभानी है।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने बताया कि प्रदेश में इन दिनों शिक्षकों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां चल रही हैं, इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों की एसआईआर कार्य में ड्यूटी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षकों को उनके कार्यस्थल से काफी दूर तैनात किया गया है, जबकि कुछ शिक्षकों और शिक्षिकाओं को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ ड्यूटी सौंप दी गई है। ऐसी स्थिति में सभी स्थानों पर पहुंचना उनके लिए संभव नहीं है, जिससे उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
देहरादून जिले में एक शिक्षिका का मामला विशेष रूप से चर्चा में है। उनकी ड्यूटी धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के दीपनगर में बीएलओ के साथ लगाई गई है। इसके अलावा उसी शिक्षिका का नाम धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी ड्यूटी के लिए शामिल किया गया है। इसी तरह के कई अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनसे शिक्षक समुदाय में नाराजगी बढ़ रही है।
शिक्षकों का आरोप है कि देहरादून तहसील कार्यालय स्तर पर ड्यूटी निर्धारण में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों के नाम मनमाने तरीके से सूची में जोड़े गए, कुछ के हटाए गए और कई शिक्षकों को एक से अधिक स्थानों पर तैनाती दे दी गई। इससे पूरे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस व्यवस्था को शिक्षकों का उत्पीड़न बताया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा कि इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए शिक्षक 8 जून को सचिवालय कूच करेंगे और सरकार व प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखेंगे।
