(सलीम रज़ा, पत्रकार )
विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। जैसा कि हम सभी लोगों को मालूम है कि विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। आज के समय में पर्यावरण केवल एक चर्चा का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा हुआ एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता के लिए स्वच्छ वायु, निर्मल जल, हरित वन और संतुलित जलवायु का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि पर्यावरण असंतुलित होगा तो मानव जीवन सहित समस्त जीव-जगत पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
पर्यावरण शब्द का अर्थ हमारे चारों ओर मौजूद प्राकृतिक और सामाजिक परिस्थितियों से है। इसमें वायु, जल, भूमि, वनस्पतियाँ, जीव-जंतु, नदियाँ, पर्वत और प्राकृतिक संसाधन शामिल होते हैं। मनुष्य का जीवन पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर है। हम जिस हवा में साँस लेते हैं, जो पानी पीते हैं और जिस भूमि पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं, वह सब पर्यावरण का ही हिस्सा है। इसलिए पर्यावरण का संरक्षण वास्तव में मानव जीवन का संरक्षण है।
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन के बाद की गई थी। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर वैश्विक स्तर पर विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। वर्ष 1973 से यह दिवस नियमित रूप से मनाया जा रहा है। तब से लेकर आज तक यह दिन पर्यावरण संबंधी जागरूकता फैलाने और लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रमुख माध्यम बना हुआ है।
वर्तमान समय में पर्यावरण अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ती जनसंख्या, तीव्र औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। जंगलों की कटाई तेजी से बढ़ रही है, जिससे जैव विविधता को नुकसान पहुँच रहा है। उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा है। नदियों और जलाशयों में रासायनिक अपशिष्ट तथा प्लास्टिक कचरा डाले जाने से जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त भूमि प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और प्लास्टिक प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बनती जा रही हैं।
जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है। पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और मौसम के चक्र में असामान्य परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। कहीं अत्यधिक वर्षा हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनी रहती है। चक्रवात, बाढ़, गर्मी की लहरें और जंगलों में आग जैसी प्राकृतिक आपदाएँ पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता से सामने आ रही हैं। इन परिस्थितियों का सीधा प्रभाव कृषि, जल संसाधनों, वन्य जीवन और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव केवल प्रकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। प्रदूषित वायु के कारण श्वसन संबंधी रोग, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। दूषित जल अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है। रासायनिक पदार्थों और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में खाद्य और जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। पेड़ न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वायु को शुद्ध बनाने का कार्य भी करते हैं। वे वर्षा चक्र को संतुलित रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने और अनेक जीव-जंतुओं को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाना और उनकी देखभाल करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व होना चाहिए। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बड़ा होने तक सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
जल संरक्षण भी पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पृथ्वी पर उपलब्ध मीठे पानी की मात्रा सीमित है। बढ़ती आबादी और अनियंत्रित जल उपयोग के कारण कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना समय की आवश्यकता है। यदि हम आज पानी की बचत नहीं करेंगे तो भविष्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्लास्टिक प्रदूषण भी एक बड़ी चिंता का विषय है। एक बार उपयोग होने वाला प्लास्टिक पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है क्योंकि यह आसानी से नष्ट नहीं होता। प्लास्टिक कचरा नदियों, समुद्रों और भूमि को प्रदूषित करता है तथा अनेक जीव-जंतुओं के लिए खतरा बन जाता है। इसलिए कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग, प्लास्टिक की बोतलों और अन्य उत्पादों का सीमित प्रयोग तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण में सरकारों के साथ-साथ समाज और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकारें विभिन्न कानूनों और योजनाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास करती हैं, लेकिन उनकी सफलता तभी संभव है जब जनता भी सक्रिय सहयोग करे। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं को पर्यावरण संबंधी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। बच्चों और युवाओं को प्रकृति के महत्व के बारे में शिक्षित करना भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश देता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे-छोटे कदम उठाए, जैसे बिजली की बचत करना, पानी को व्यर्थ न बहाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, पेड़ लगाना और स्वच्छता बनाए रखना, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संबंधी समस्याओं का समाधान संभव है।
प्रकृति और मानव का संबंध अत्यंत गहरा और अटूट है। प्रकृति हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है। इसलिए उसका संरक्षण करना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य भी है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि पृथ्वी हमारी साझा धरोहर है और इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम आज पर्यावरण के प्रति सजग और जिम्मेदार बनेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित, हरित और स्वस्थ वातावरण प्रदान कर सकेंगे। यही विश्व पर्यावरण दिवस की सार्थकता है और यही इसके आयोजन का वास्तविक उद्देश्य भी है।

