पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा के पास पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, वह एक जबरन वसूली मामले में वांछित था और कई दिनों से गिरफ्तारी से बच रहा था। पश्चिम बंगाल पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट उसका पता लगाकर उसे हिरासत में लिया। अधिकारियों का मानना है कि वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।
जहांगीर खान और उसके कई सहयोगियों के खिलाफ जबरन वसूली, धमकी, मारपीट तथा चुनावी हिंसा से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान मिली शिकायतों और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया था। 293 सीटों वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे, लेकिन आयोग ने फाल्टा सीट पर मतदान रद्द कर दिया था। आयोग ने अपने निर्णय में गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का हवाला दिया था।
फाल्टा के कई मतदान केंद्रों से मतदाताओं को डराने-धमकाने, ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और विपक्षी उम्मीदवारों के नाम मिटाने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इसके अलावा, पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता की पुष्टि करना भी संभव नहीं हो पाया था।
जहांगीर खान चुनाव के दौरान अपने बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रहा था। उसने पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा, जिन्हें ‘सिंघम’ के नाम से जाना जाता है, को चुनौती देते हुए खुद को ‘पुष्पा’ बताया था। चुनाव से पहले अजय पाल शर्मा ने उसके घर जाकर परिवार के सदस्यों को मतदाताओं को डराने-धमकाने से बचने की चेतावनी दी थी। इसके जवाब में जहांगीर ने कहा था, “अगर वह सिंघम है, तो मैं पुष्पा हूं।”कई सप्ताह तक फरार रहने के बाद आखिरकार पुलिस ने उसे नेपाल सीमा के पास दबोच लिया। अब उससे जुड़े मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
