देहरादून: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित इलेक्ट्रिक एसी बसों के परिचालकों और आउटसोर्स एजेंसी के बीच वेतन भुगतान को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले तीन दिनों से हड़ताल पर बैठे परिचालकों और बस संचालन का जिम्मा संभाल रही आरके एसोसिएट्स कंपनी के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। हड़ताल के कारण शहर में स्मार्ट सिटी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है और सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वेतन भुगतान में कथित देरी और अनियमितताओं से नाराज परिचालकों ने कामकाज ठप कर रखा है। इसके चलते स्मार्ट सिटी की सभी इलेक्ट्रिक एसी बसें ट्रांसपोर्टनगर स्थित कार्यशाला में खड़ी हैं और उनका संचालन पूरी तरह बंद है। परिचालकों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
इधर, हड़ताल के तीसरे दिन कंपनी ने आंदोलनकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है। बुधवार को जारी कार्यालय आदेश में सभी परिचालकों को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहना, कार्य बहिष्कार करना, बस संचालन में बाधा उत्पन्न करना अथवा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि में शामिल होना सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
कंपनी द्वारा जारी नोटिस में चेतावनी दी गई है कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। इसके अलावा नियुक्ति के समय जमा कराई गई सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि भी जब्त की जा सकती है। कंपनी ने कहा है कि कर्मचारियों को कई बार काम पर लौटने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बावजूद वे हड़ताल पर बने हुए हैं, जिससे सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, बसों के संचालन में बाधा डालने या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कंपनी ने सभी कर्मचारियों से अनुशासन बनाए रखने और तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने की अपील की है।
दूसरी ओर, परिचालकों का कहना है कि जब तक उनके लंबित वेतन और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि कंपनी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
वेतन भुगतान को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब श्रमिकों और आउटसोर्स एजेंसी के बीच सीधी टकराहट में बदलता नजर आ रहा है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन, स्मार्ट सिटी प्रबंधन और कंपनी इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल बस संचालन ठप रहने से शहर की स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
