अल्मोड़ा। मौलेखाल के तल्ला सल्ट क्षेत्र के तड़म और आसपास के गांवों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष का असर अब बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है। बाघ की दहशत को देखते हुए क्षेत्र के तीन राजकीय विद्यालयों को स्थिति सामान्य होने तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।
बंद किए गए विद्यालयों में राजकीय प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा और राजकीय जूनियर हाईस्कूल घजीरा शामिल हैं। क्षेत्र में वन्यजीव के हमले में बौरड़ा तोक निवासी महिपाल सिंह और डबरा सौराल निवासी शालिनी की मौत के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल और गहरा गया है।
सोमवार को बौरड़ा विद्यालय में शिक्षकों और अभिभावकों की बैठक हुई। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए सभी की सहमति से विद्यालय बंद रखने का निर्णय लिया गया। खंड शिक्षा अधिकारी सल्ट हरेंद्र शाह ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्थिति सामान्य होने तक शिक्षक अन्य विद्यालयों में रहकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराएंगे।
हालांकि, ग्रामीणों के सामने ऑनलाइन पढ़ाई भी चुनौती बनी हुई है। कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ और अन्य जंगली जानवर अब घरों के आसपास तक पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों को स्कूल भेजना भी जोखिम भरा हो गया है।
सुरक्षा नहीं मिली तो पलायन का डर
अभिभावकों का कहना है कि वन विभाग बच्चों को सुरक्षित स्कूल तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं कर पाया है। उनका कहना है कि केवल आश्वासनों के भरोसे बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती। यदि जल्द सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं हुए तो ग्रामीणों के सामने निचले और शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
बाघ की दहशत का असर ग्रामीणों की आजीविका पर भी पड़ा है। कई ग्रामीणों ने अपनी गाय-भैंस और अन्य पालतू पशु तक बेच दिए हैं। पशुपालन से होने वाली आय प्रभावित होने के कारण परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उनकी जान, बच्चों की सुरक्षा और भविष्य तीनों खतरे में हों तो गांव छोड़ना मजबूरी बन सकता है। अब ग्रामीण वन विभाग और प्रशासन से बाघ के आतंक पर प्रभावी कार्रवाई और सुरक्षा के ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
