देहरादून: प्रदेश में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मैपिंग की धीमी रफ्तार पर चुनाव तंत्र ने सख्त रुख अपनाया है। खासतौर पर देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में अपेक्षाकृत कम प्रगति पाए जाने पर संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि एसआईआर की तैयारी में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रत्येक जिले को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया।
राज्य में अब तक लगभग 87 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ प्रमुख जिलों में यह कार्य अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। इसे लेकर अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए निर्देश दिए गए कि शहरी इलाकों में नगर निगम के कर्मचारियों को भी इस कार्य में लगाया जाए, ताकि प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
बीएलओ की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार जारी रखने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि हर बूथ पर शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की नियुक्ति हो। इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, गणना प्रपत्रों के वितरण को लेकर भी सभी जिलों को पहले से विस्तृत योजना तैयार करने को कहा गया है, ताकि निर्धारित समय के भीतर पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।
यदि जिलावार प्रगति पर नजर डालें तो रुद्रप्रयाग और बागेश्वर ने 100 प्रतिशत मैपिंग पूरी कर उदाहरण प्रस्तुत किया है, जबकि चंपावत और उत्तरकाशी 99 प्रतिशत के साथ लगभग लक्ष्य के करीब हैं। अल्मोड़ा 97 प्रतिशत पर है, जबकि पिथौरागढ़, टिहरी और चमोली ने 95 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। पौड़ी 93 प्रतिशत और हरिद्वार 89 प्रतिशत तक पहुंचा है। दूसरी ओर नैनीताल 88 प्रतिशत पर है, जबकि ऊधमसिंह नगर और देहरादून सबसे पीछे 77-77 प्रतिशत पर बने हुए हैं, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।
