देहरादून: समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मुद्दा अब उत्तराखंड से निकलकर असम और पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है। हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दोनों राज्यों के अपने संकल्प पत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां आजादी के बाद यूसीसी को लागू किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इसका वादा किया था, जिसे सरकार बनने के बाद लागू किया गया। इसके बाद अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लेकर चर्चा तेज हो गई।
असम में भाजपा ने यूसीसी के साथ-साथ लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने का भी वादा किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल में भी सत्ता में आने पर यूसीसी लागू करने की बात पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन वादों का मतदाताओं पर प्रभाव पड़ा है। उत्तराखंड में पहले से लागू कानून अब अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
तीन राज्यों में जीत के बाद भाजपा के हौसले और बुलंद नजर आ रहे हैं। पार्टी नेता अब 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2029 के लोकसभा और 2032 के आगामी चुनावों को लेकर भी रणनीति बनाते दिख रहे हैं। उनका मानना है कि हालिया जीत से भविष्य में पार्टी की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
