पेपर लीक के गंभीर आरोपों और कई राज्यों से सामने आई जांच रिपोर्टों के बाद राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट स्नातक को रद्द कर दिया गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने आज घोषणा करते हुए कहा कि तीन मई 2026 को आयोजित हुई यह परीक्षा अब मान्य नहीं रहेगी और इसे दोबारा कराया जाएगा। एजेंसी ने यह फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद लिया है। इस फैसले ने देशभर के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को झकझोर दिया है।
इस वर्ष आयोजित नीट परीक्षा में लगभग चौबीस लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर कई राज्यों से शिकायतें सामने आई थीं। राजस्थान और उत्तराखंड से प्राप्त सूचनाओं में दावा किया गया कि परीक्षा से पहले प्रश्नों के कुछ सेट प्रसारित किए गए थे और बाद में उनमें से कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी मेल खाते पाए गए। एजेंसी ने केंद्रीय एजेंसियों तथा कानून प्रवर्तन संस्थाओं के साथ समन्वय कर उपलब्ध सामग्री की समीक्षा की, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना निष्पक्षता और विश्वसनीयता के मानकों के अनुकूल नहीं होगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह ने ऐसे प्रश्न बैंक की जांच की जिसमें चार सौ से अधिक प्रश्न शामिल थे। बताया जा रहा है कि इनमें से जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के सौ से अधिक प्रश्न अंतिम प्रश्नपत्र से काफी समान पाए गए। इसके बाद राजस्थान के सीकर सहित कई स्थानों और उत्तराखंड के देहरादून में तलाशी तथा जांच अभियान चलाए गए। कुछ कोचिंग संचालकों और बिचौलियों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
महाराष्ट्र के लातूर से भी कथित परीक्षा श्रृंखला और वीडियो सामने आए हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने कहा कि वहां फिलहाल कोई औपचारिक जांच शुरू नहीं हुई है। इसके बावजूद इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने बताया कि आठ मई को ही मामले को स्वतंत्र सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए परीक्षा को रद्द करना ही एकमात्र विकल्प बचा था।
केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की व्यापक जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़े आरोपों की गहराई से जांच आवश्यक है ताकि दोषियों की पहचान हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने भी जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है और कहा है कि सभी आवश्यक दस्तावेज, अभिलेख और सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया कि परीक्षा दोबारा कराने से विद्यार्थियों और उनके परिवारों को भारी असुविधा होगी। लंबे समय तक तैयारी करने वाले छात्रों में मानसिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ है। इसके बावजूद एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौजूदा परिस्थितियों में इससे कम कठोर कदम पर्याप्त नहीं होता।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने छात्रों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि मई 2026 के लिए किया गया पंजीकरण, अभ्यर्थिता संबंधी विवरण और परीक्षा केंद्रों की प्राथमिकताएं यथावत रहेंगी। विद्यार्थियों को दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी और उनसे कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी तथा पुनर्परीक्षा एजेंसी के अपने संसाधनों के माध्यम से आयोजित की जाएगी।
एजेंसी ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वह केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया या अन्य अनौपचारिक मंचों पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों से बचें। नई परीक्षा तिथियों और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा।
उधर, इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा है कि नीट एक नीलामी बन गया है, जहां परीक्षा से पहले मैसेजिंग एप्स पर प्रश्नपत्र बेचे जाने के आरोप लगे जबकि लाखों छात्रों ने पूरे वर्ष कठिन मेहनत की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के सपनों को सबसे ज्यादा नुकसान मौजूदा सरकार ने पहुंचाया है।
