दिल्ली : मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में निकाले गए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह संसद भवन के नजदीक तक पहुंच गया, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को तत्काल मुख्य प्रवेश द्वार बंद करना पड़ा और पूरे परिसर में सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया। करीब दो दशक बाद किसी प्रदर्शन का संसद भवन के इतने करीब पहुंचना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रेल भवन और कृषि भवन के पास बैरिकेडिंग की, लेकिन भीड़ लगातार आगे बढ़ती रही। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के कारण संसद मार्ग, अशोक रोड, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
करीब दोपहर दो बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग की ओर बढ़ने का एक और प्रयास किया। पुलिस की चेतावनी के बावजूद भीड़ नहीं रुकी तो आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। लगभग 2:20 बजे भगदड़ जैसे हालात बन गए।
जंतर-मंतर से निकलने के बाद मार्च धीरे-धीरे संगठित प्रदर्शन की बजाय भीड़ में बदल गया। प्रदर्शनकारियों के बीच नेतृत्व और समन्वय कमजोर पड़ गया, जिसके चलते लोग अलग-अलग रास्तों से संसद की ओर बढ़ते रहे। सुरक्षा बैरिकेड पार करने की कोशिशों के दौरान कई जगह पुलिस के साथ झड़पें हुईं। जानकारों का कहना है कि संगठनात्मक तैयारी और समन्वय की कमी से स्थिति और अधिक अव्यवस्थित हो गई।
पुलिस के अनुसार झड़पों में 50 से अधिक पुलिसकर्मी और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए हैं। वहीं सीजेपी का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में उसके कई कार्यकर्ताओं को भी गंभीर चोटें आई हैं।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई। इसका असर केवल प्रदर्शनकारियों पर ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भी पड़ा। दूसरे जिलों से आए कई जवान गूगल मैप का उपयोग नहीं कर सके और उन्हें अपनी तैनाती वाली जगह तक पहुंचने के लिए लोगों से रास्ता पूछना पड़ा। कुछ मामलों में कार्यालयों के ब्रॉडबैंड इंटरनेट की मदद से मार्ग तलाशकर कागज पर दिशा-निर्देश लिखकर दिए गए।
इंटरनेट सेवा बंद होने से ऐप आधारित टैक्सी और बाइक सेवाएं भी प्रभावित रहीं। नई दिल्ली के बाजारों और दफ्तरों में ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था बाधित होने से दुकानदारों और ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूर-दराज से आए कई प्रदर्शनकारी भी रास्ता पूछते हुए जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में भटकते नजर आए।
प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी सहित कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंचे। अभिनेत्री शबाना आजमी समेत कुछ अन्य हस्तियों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। इसी दौरान आइसा से जुड़े छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। उनके साथ मौजूद गीतांजलि जे. आगमो ने भी पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बल प्रयोग कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक परिस्थितियों में किया गया।
