लखनऊ : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का भव्य उद्घाटन किया। यह स्थल देश के महान राष्ट्रवादी और दूरदर्शी नेताओं के विचारों, संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को समर्पित है। उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा, त्याग और देशभक्ति की जीवंत प्रेरणा बनेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महापुरुषों ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का साधन माना। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन भारतीय लोकतंत्र, सुशासन और मानवीय मूल्यों का प्रतीक रहा है। उनके विचार आज भी देश को दिशा देने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरक केंद्र बनेगा, जो भारत के गौरवशाली अतीत को समझकर उसके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।
इस भव्य परिसर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। ये प्रतिमाएं न केवल उनके व्यक्तित्व की ऊंचाई को दर्शाती हैं, बल्कि भारतीय राजनीतिक और वैचारिक परंपरा में उनके अमूल्य योगदान की भी प्रतीक हैं। इन तीनों नेताओं ने अलग-अलग दौर में राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए देश को नई दिशा दी। परिसर में स्थापित प्रतिमाएं युवाओं को उनके आदर्शों और मूल्यों से परिचित कराने का कार्य करेंगी।
‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का एक प्रमुख आकर्षण यहां बना अत्याधुनिक म्यूजियम है, जो लगभग 98,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है। इस म्यूजियम की बनावट कमल के फूल के आकार की है, जो भारतीय संस्कृति, लोकतंत्र और विकास का प्रतीक माना जाता है। म्यूजियम में देश की स्वतंत्रता से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यहां आगंतुकों को न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी मिलेगी, बल्कि वे भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास को भी करीब से महसूस कर सकेंगे।
म्यूजियम को लेटेस्ट डिजिटल और इमर्सिव तकनीक से लैस किया गया है, जिससे दर्शकों को एक जीवंत और संवादात्मक अनुभव प्राप्त होता है। डिजिटल प्रदर्शनों, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, विचारों और संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। यहां आने वाले लोग न केवल इतिहास को पढ़ेंगे, बल्कि उसे अनुभव भी कर पाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह के स्थल देश की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने महान नेताओं के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेते हैं, तभी एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ देशभर से आने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा और राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगा।
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर इस ऐतिहासिक पहल को उनकी स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है। यह स्थल न केवल अटल जी, बल्कि उन सभी विचारधाराओं और मूल्यों को समर्पित है, जिन्होंने भारत को एक मजबूत, लोकतांत्रिक और संवेदनशील राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई। लखनऊ में स्थापित यह ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ आने वाले समय में देश के प्रमुख सांस्कृतिक और वैचारिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बनाएगा।
