देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2025 के अंतिम दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के पर्वतीय जिलों में 30 और 31 दिसंबर को बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। मौसम में इस बदलाव का असर आम लोगों के साथ-साथ यातायात, पर्यटन और तापमान पर भी साफ दिखाई देगा।
पर्वतीय जिलों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं। इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बर्फ गिरने से ठंड में और इजाफा हो सकता है। खासतौर पर बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली, मुनस्यारी और गंगोत्री क्षेत्र में तापमान शून्य से नीचे जाने की संभावना जताई जा रही है। बर्फबारी के चलते पहाड़ी सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है, जिससे आवाजाही में दिक्कतें आ सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर मैदानी जिलों हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर समेत नैनीताल, चंपावत और पौड़ी के निचले इलाकों में घना कोहरा छाए रहने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह और देर रात के समय दृश्यता काफी कम हो सकती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। कोहरे के कारण रेल और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार 31 दिसंबर को भी प्रदेश में मौसम की यही स्थिति बनी रह सकती है। नए साल के स्वागत के दौरान ठंड अपने चरम पर रहने की संभावना है। तापमान में गिरावट के चलते पर्वतीय इलाकों में शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में ठंड और कोहरे की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को मौसम की जानकारी लेकर ही निकलने की सलाह दी गई है। वहीं वाहन चालकों को कोहरे के दौरान धीमी गति से वाहन चलाने और सावधानी बरतने को कहा गया है।
मौसम में इस बदलाव का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि बर्फबारी की संभावना से पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन खराब मौसम के चलते कुछ मार्ग अस्थायी रूप से बंद होने की भी आशंका बनी हुई है।कुल मिलाकर वर्ष के अंतिम दिनों में उत्तराखंड में ठंड का असर और गहराने वाला है। ऐसे में आम लोगों को गर्म कपड़े पहनने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है।
