जालौन : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बेहद दुखद और सोचने पर मजबूर करने वाली घटना सामने आई है। मुहम्मदाबाद क्षेत्र में 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने महंगे मोबाइल फोन की मांग पूरी न होने पर जहर खा लिया। परिजन उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन हालत बिगड़ने पर झांसी रेफर की गई छात्रा को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
मृतका की पहचान डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव निवासी माया (17) के रूप में हुई है। माया एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती थी और गांव के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं की छात्रा थी। उसके पिता तुलसीराम राजपूत खेती के साथ-साथ ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद वे बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रहे थे।
परिजनों के अनुसार कुछ समय पहले माया का पुराना मोबाइल फोन खराब हो गया था। इसके बाद वह नया फोन दिलाने की जिद करने लगी। उसकी मांग एक पुराने आईफोन की थी, जिसकी कीमत परिवार की आर्थिक स्थिति से कहीं ज्यादा थी। पिता ने उसे समझाया कि फिलहाल पैसे की व्यवस्था नहीं है और 10–15 दिन बाद फसल बिकने पर वह फोन दिलाने की कोशिश करेंगे, लेकिन किशोरी इस बात से संतुष्ट नहीं हो सकी।
बताया जा रहा है कि माया का स्वभाव जिद्दी था और वह अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए बार-बार दबाव बना रही थी। पिता ने कई बार उसे प्यार से समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नाराज रहने लगी। कुछ दिन पहले उसने पिता से ऐसा वाक्य कहा, जिसे परिवार गंभीरता से नहीं ले सका। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह जिद इतना बड़ा रूप ले लेगी।
रविवार को जब घर पर कोई बड़ा मौजूद नहीं था, तभी माया ने यह खौफनाक कदम उठा लिया। पिता रोज की तरह ऑटो चलाने गए थे और मां खेत पर काम कर रही थीं। घर में अकेली माया ने चूहा मारने की दवा खा ली। कुछ देर बाद जब उसका भाई घर लौटा तो माया ने खुद ही उसे इस बारे में बताया। आनन-फानन में परिजन उसे अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
झांसी पहुंचने से पहले ही रास्ते में माया की मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद पिता तुलसीराम का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि यदि उन्हें जरा भी आभास होता कि बेटी इतना बड़ा कदम उठा लेगी, तो वे किसी भी तरह पैसे का इंतजाम कर लेते। वह बार-बार यही कहते नजर आए कि काश उन्होंने उसकी मनःस्थिति को समय रहते समझ लिया होता।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डकोर कोतवाली पुलिस परिजनों से पूछताछ कर रही है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किशोरी किन मानसिक परिस्थितियों से गुजर रही थी। फिलहाल पूरे गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है।
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझना उतना ही जरूरी है जितना उनकी जरूरतों को पूरा करना। महंगी चीजों की चाह और सामाजिक दबाव किस तरह मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ सकता है, यह घटना उसका दर्दनाक उदाहरण बन गई है।
