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January 8, 2026
देहरादून में आयोजित माल्टा महोत्सव में उत्तराखंड औद्यानिक परिषद की आय चार गुना बढ़ गई, लेकिन किसान खुद को लाभ से वंचित महसूस कर रहे हैं। किसानों से 10 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा गया सी-ग्रेड माल्टा महोत्सव में 40 रुपये प्रति किलो में बेचा गया। इसी तरह गलगल और चकोतरा किसानों से सात रुपये प्रति किलो खरीदे गए, जिन्हें विभाग ने 15 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा।
माल्टा उत्तराखंड की पहचान और परंपरा से जुड़ा फल है, लेकिन दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को इसके उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इसी उद्देश्य से सरकार ने पहली बार राजकीय उद्यान सर्किट हाउस, गढ़ीकैंट में माल्टा महोत्सव का आयोजन किया, ताकि माल्टे की ब्रांडिंग हो और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।
किसानों का कहना है कि महोत्सव में हुई बिक्री से प्राप्त आय सीधे विभाग के खाते में गई और उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला। पिथौरागढ़ और बागेश्वर से आए किसानों ने बताया कि माल्टा न्यूनतम समर्थन मूल्य 10 रुपये तय होने के बावजूद उनके क्षेत्रों में न तो क्रय केंद्र हैं और न ही बेहतर बिक्री की व्यवस्था।
उद्यान विभाग का कहना है कि जो माल्टा बाजार में नहीं बिक पाता, उसे सी-ग्रेड मानते हुए 10 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा गया। वहीं कृषि एवं उद्यान मंत्री ने कहा कि बाजार में माल्टे की अच्छी मांग है और किसान सीधे 40 रुपये प्रति किलो तक बेच सकते हैं। भविष्य में दिल्ली में भी माल्टा महोत्सव आयोजित करने की योजना है।
महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 253 क्विंटल माल्टा, 29 क्विंटल गलगल, 12 क्विंटल कागजी नींबू और 4.50 क्विंटल चकोतरा लाया गया, जिसमें से सीमित मात्रा में फुटकर बिक्री हुई, जबकि अधिकांश उपज संरक्षण इकाइयों को दी गई।
