देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर वन भूमि पर निवास कर रहे परिवारों के हितों और अधिकारों पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह विषय लाखों लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा है, जिस पर व्यापक चर्चा केवल विधानसभा के मंच पर ही संभव है।
यशपाल आर्य ने कहा कि ऋषिकेश के पशुलोक क्षेत्र का मामला न्यायालय के निर्देशों के बाद और गंभीर हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायालय में वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत मिलने वाले अधिकारों, वन भूमि के पट्टों और पीढ़ियों से वन भूमि पर रह रहे लोगों की मजबूरियों पर विस्तार से चर्चा संभव नहीं है। राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इस तरह के मामले मौजूद हैं और लोगों को उजड़ने से बचाना सरकार का प्रमुख कर्तव्य है।
उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने ऋषिकेश के पशुलोक और आसपास की 2866 एकड़ भूमि के मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव और मुख्य वन संरक्षक को वन भूमि की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करने का आदेश दिया है। यह भूमि वर्ष 1952 में मीरा बेन को लीज पर दी गई थी, जहां पशुलोक सेवा समिति के माध्यम से पशु संवर्धन का कार्य शुरू हुआ था। बाद में इसी भूमि पर एम्स ऋषिकेश, आईडीपीएल और अन्य सरकारी प्रतिष्ठान स्थापित हुए, साथ ही बड़ी संख्या में टिहरी विस्थापितों का पुनर्वास भी किया गया।
आर्य ने उदाहरण देते हुए कहा कि गौलापार का बागजाला गांव पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा है, हल्द्वानी के दमुवाढुंगा क्षेत्र में हजारों लोग पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं और नैनीताल जिले का बिंदुखत्ता क्षेत्र 200 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर आबाद है। ऐसे में उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वन भूमि पर बसे लोगों के अधिकारों और समस्याओं पर गंभीर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए।
