देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामले में एआई और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर दो अलग-अलग शिकायतों पर एसटीएफ ने प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं ने खुद को आम सजग नागरिक बताते हुए कहा कि भ्रामक वीडियो और एआई के जरिए तस्वीरों को अश्लील बनाए जाने से वे स्तब्ध हैं। इसी कारण तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई।
एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर विशेषज्ञ टीम को जांच सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद एआई तकनीक के दुरुपयोग में शामिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की डीपफेक नकल का आरोप
पहली एफआईआर सहस्रधारा रोड निवासी रोहित शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि ‘सुमित्रा भुल्लर’ नामक फेसबुक प्रोफाइल के जरिए एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे व आवाज की हूबहू नकल तैयार की गई। इस फर्जी वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर तथ्यहीन और आपत्तिजनक बयान दिखाए गए हैं।
अमर उजाला से बातचीत में रोहित शर्मा ने कहा कि वे पेशे से व्यापारी हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई। उनका कहना है कि इस तरह के भ्रामक वीडियो न केवल संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में आक्रोश फैलाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश भी करते हैं।
ग्रोक एआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग
दूसरी एफआईआर ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी संजय सिंह राणा (33) ने दर्ज करवाई है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ग्रोक एआई के खिलाफ शिकायत दी है। संजय का आरोप है कि जहां चैट जीपीटी जैसे अन्य एआई प्लेटफॉर्म अश्लील या अवैध निर्देशों को अस्वीकार कर देते हैं, वहीं ग्रोक एआई ऐसे निर्देश स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि ग्रोक एआई पर सामान्य नागरिकों, विशेषकर महिलाओं की तस्वीरों को डिजिटल रूप से नग्न और अश्लील रूप में बदला जा रहा है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
खुद की फोटो को साक्ष्य के रूप में किया प्रस्तुत
संजय सिंह राणा ने बताया कि सत्यता जांचने के लिए उन्होंने खुद की एक सामान्य तस्वीर ग्रोक एआई पर अपलोड की और कमांड दी, जिसके बाद उनकी अश्लील तस्वीर तैयार हो गई। उन्होंने उसका स्क्रीनशॉट साक्ष्य के तौर पर पुलिस को सौंपा है। उन्होंने इसे डिजिटल यौन उत्पीड़न, निजता का उल्लंघन, महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने और अपराध को बढ़ावा देने वाला कृत्य बताते हुए इसमें शामिल प्लेटफॉर्म संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
