देहरादून। पटेलनगर क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक सुबेदा बेगम उर्फ प्रिया के मामले ने राज्य में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े के सिंडिकेट की ओर इशारा किया है। जांच में सामने आया है कि सुबेदा के जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे फर्जी दस्तावेज देहरादून और रुड़की स्थित दो कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिए बनवाए गए थे।
पटेलनगर पुलिस ने दून स्थित सीएससी सेंटर के संचालक फिरोज से पूछताछ की है। उसने बताया कि सुबेदा का आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भेजा गया था, जिसका सत्यापन बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उस समय किन बीएलओ की ड्यूटी थी।
पुलिस जांच का फोकस अब उस सिंडिकेट पर है, जिसने पहले भी मामून हसन और बबली बेगम जैसे घुसपैठियों को फर्जी भारतीय पहचान दिलाई थी। सुबेदा ने पूछताछ में रुड़की के सीएससी संचालक अजीत कुमार और देहरादून के फिरोज का नाम लिया है। यह पैटर्न पिछले साल पकड़े गए मामून हसन के मामले से मिलता-जुलता है, जो सचिन चौहान बनकर देहरादून में रह रहा था और फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहा था।
इसी तरह, नवंबर में पटेलनगर से गिरफ्तार बबली बेगम भी भूमि शर्मा के नाम से रह रही थी और उसके पास आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे फर्जी दस्तावेज मिले थे। इन मामलों में भी सीएससी सेंटरों की भूमिका जांच के दायरे में है।
बीएलओ की भूमिका पर सवाल
सुबेदा ने कबूल किया है कि उसका वोटर कार्ड स्थानीय बीएलओ की संस्तुति पर बना था। इससे पहले भी ऐसे मामलों में यह सवाल उठ चुका है कि बिना ठोस दस्तावेजों के विदेशी नागरिकों का स्थानीय स्तर पर सत्यापन कैसे हो जाता है। आशंका है कि कुछ विभागीय कर्मचारी इस सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
जांच तेज, आरोपियों की तलाश जारी
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, सुबेदा के पास से मिले बांग्लादेशी भाषा के पहचान पत्रों और अन्य फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। पुलिस की एक टीम रुड़की में नामजद आरोपी अजीत की तलाश में जुटी है। यह भी जांच की जा रही है कि इन सीएससी सेंटरों के माध्यम से अब तक कितने अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज दिलाए गए।
बताया गया कि देहरादून में अब तक 20 बांग्लादेशी नागरिक पुलिस के रडार पर आ चुके हैं। इनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले 10 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।
