उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वन और पर्यटन विभाग ने गढ़वाल व कुमाऊं हिमालयी क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोल दिया है। इन अधिसूचित चोटियों पर भारतीय पर्वतारोहियों से पीक शुल्क, कैंपिंग शुल्क और पर्यावरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
खुली गई चोटियों में कामेट, नंदा देवी (पूर्वी), चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्वप्रसिद्ध चोटियां शामिल हैं, जिनकी ऊंचाई समुद्रतल से 5700 मीटर से लेकर 7756 मीटर तक है।
सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से देश के युवा पर्वतारोहियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। विदेशी पर्वतारोहियों को भी राहत दी गई है। अब उन्हें केवल भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF), नई दिल्ली द्वारा निर्धारित शुल्क का ही भुगतान करना होगा।
पर्वतारोहण अभियानों के लिए सभी आवेदन उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम के माध्यम से किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय साहसिक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, यह निर्णय पर्यावरण-संतुलित पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिमालय को साहस, अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
