देशभर के ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो ड्राइवर आज शनिवार को एक दिन की हड़ताल पर हैं। हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों का कहना है कि अवैध बाइक टैक्सी सेवाएं, ऐप कंपनियों की मनमानी किराया नीतियां और पैनिक बटन इंस्टॉलेशन की बढ़ती लागत ने उनकी कमाई और सुरक्षा दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। यह हड़ताल महाराष्ट्र कमगार सभा यूनियन के आह्वान पर बुलाई गई है। यूनियन का कहना है कि उनका मकसद लंबे समय से चली आ रही इन समस्याओं की ओर सरकार और संबंधित विभागों का ध्यान खींचना है।
ड्राइवरों का दावा है कि हड़ताल के तहत उन्होंने अपने वाहन सड़कों पर नहीं उतारे, हालांकि इसके बावजूद उबर, ओला और रैपिडो जैसे प्रमुख ऐप प्लेटफॉर्म पर सुबह से टैक्सी और ऑटो बुकिंग की सुविधा उपलब्ध दिखाई दी। ड्राइवरों का आरोप है कि ऐप कंपनियां किराया तय करने में पूरी तरह मनमानी कर रही हैं, जिससे उनकी आमदनी लगातार घट रही है। इसके साथ ही अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं के कारण लाइसेंसधारी टैक्सी और ऑटो चालकों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
ड्राइवरों ने पैनिक बटन इंस्टॉलेशन को भी एक बड़ी समस्या बताया है। उनका कहना है कि अब पैनिक बटन लगवाना न सिर्फ महंगा बल्कि काफी जटिल भी हो गया है। केंद्र सरकार ने जहां 140 कंपनियों को इसके लिए मंजूरी दी है, वहीं राज्य सरकार ने इनमें से करीब 70 प्रतिशत कंपनियों को अनधिकृत घोषित कर दिया है। इसके चलते ड्राइवरों को पुराने डिवाइस हटाकर नए पैनिक बटन लगवाने पड़ रहे हैं, जिस पर लगभग 12 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। इसके अलावा खुले परमिट नीति के कारण ऑटो की संख्या बढ़ने से भी ड्राइवरों की आय पर नकारात्मक असर पड़ा है।
ड्राइवरों ने यह भी चिंता जताई कि अगर किसी अवैध बाइक टैक्सी से दुर्घटना होती है, तो पीड़ित को बीमा का लाभ तक नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इस तरह की हड़तालें और तेज हो सकती हैं।
