दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया, जो एक नया प्रशासनिक परिसर है। इस नई इमारत में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और मंत्रिमंडल सचिवालय को एक ही स्थान पर स्थापित किया गया है। केंद्र सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, ये नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना के आधुनिकीकरण का प्रतीक हैं और कुशल, सुलभ तथा नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
पिछले कई दशकों से विभिन्न मंत्रालय सेंट्रल विस्टा के अलग-अलग पुराने भवनों से कार्य कर रहे थे, जिससे समन्वय की कमी, रसद संबंधी कठिनाइयां और रखरखाव की बढ़ती लागत जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए परिसरों का उद्देश्य इन समस्याओं का समाधान करना है, जहां प्रमुख प्रशासनिक विभागों को भविष्य के अनुरूप आधुनिक बुनियादी ढांचे में एक साथ लाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, लागत में कमी आएगी और प्रशासनिक पारदर्शिता में सुधार होगा।
सेवा तीर्थ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ-1), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (सेवा तीर्थ-2) और मंत्रिमंडल सचिवालय (सेवा तीर्थ-3) एक ही स्थान पर कार्य करेंगे। पहले ये संस्थान अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे। इनके एकीकृत होने से उच्च स्तर पर रणनीतिक समन्वय और नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कॉर्पोरेट मामले, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक तथा जनजातीय मामलों सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं, जिससे अंतर-मंत्रालयी सहयोग बेहतर होगा और नागरिकों की पहुंच आसान बनेगी।
नए परिसरों को डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय प्रणाली, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इससे प्रशासनिक दक्षता और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्नत डिजिटल अवसंरचना ई-गवर्नेंस को मजबूत करेगी और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने में सहायक होगी। ये भवन 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार बनाए गए हैं, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली, जल संरक्षण उपाय, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा-कुशल डिजाइन शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, ये सुविधाएं पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए प्रशासनिक कार्यक्षमता को बेहतर बनाएंगी।
