नई दिल्ली: बजट सत्र के दूसरे चरण के दूसरे दिन मंगलवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संसद के प्रवेश द्वार मकर द्वार की सीढ़ियों पर किया गया, जहां विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने नारेबाजी की और हाथों में पोस्टर तथा बैनर लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। बैनर पर प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तस्वीरें लगी थीं और उस पर लिखा था कि प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में वे सांसद भी शामिल थे जिन्हें बजट सत्र के पहले चरण में सदन में अव्यवस्थित आचरण के कारण लोकसभा से शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ नारे लगाए और पश्चिम एशिया के मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की। उनका कहना था कि सरकार इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर चर्चा से बच रही है।
इसी बीच जब संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई तो लोकसभा में भाजपा सांसद संध्या राय ने अध्यक्षता की, जबकि राज्यसभा में सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही का संचालन किया। कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्य सदन के वेल में पहुंचे और तख्तियां दिखाते हुए नारेबाजी की। इस कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए हंगामेदार हो गया।
इससे एक दिन पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर बहस कराने से इसलिए बच रही है क्योंकि इससे यह सामने आ जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका और इजरायल के साथ किस तरह के समझौते कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं है बल्कि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका प्रभाव महंगाई और आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा। उनके अनुसार यह एक गंभीर विषय है जिस पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जो स्थिति बन रही है वह केवल क्षेत्रीय संकट नहीं है बल्कि इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वहां चल रही स्थिति एक बड़े परिवर्तन की लड़ाई की तरह है और इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। उन्होंने शेयर बाजार में आई हलचल का जिक्र करते हुए कहा कि देश को इससे बड़ा झटका लग सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है तो सरकार संसद में इस पर चर्चा से क्यों बच रही है। उनका कहना था कि पहले इस विषय पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए और उसके बाद अन्य मुद्दों पर बहस की जा सकती है। राहुल गांधी ने कहा कि ईंधन की कीमतें, अर्थव्यवस्था और वैश्विक संकट जैसे मुद्दे सीधे तौर पर जनता से जुड़े हैं, इसलिए संसद में इन पर गंभीर चर्चा होना जरूरी है।
