देहरादून: रसोई गैस की बढ़ती मांग, कालाबाजारी की आशंका और आपूर्ति पर दबाव के बीच तेल कंपनियों ने एलपीजी वितरण व्यवस्था में बड़ा तकनीकी और नीतिगत बदलाव लागू कर दिया है। अब सिलिंडर बुकिंग पहले जैसी सरल और तुरंत उपलब्ध नहीं रहेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को तय अंतराल का सख्ती से पालन करना होगा। इस नई व्यवस्था में अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए अलग समय सीमा तय की गई है, जिससे गैस के उपयोग और वितरण पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके।
नई प्रणाली के तहत सबसे बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए किया गया है। अब 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलिंडर की बुकिंग के लिए उन्हें 45 दिनों का इंतजार करना होगा, जबकि सामान्य उपभोक्ता 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर सकेंगे। इसी तरह छोटे यानी 5 किलो के ‘छोटू’ सिलिंडर के लिए भी अंतराल अलग-अलग रखा गया है—सामान्य उपभोक्ताओं को यह 9 दिन में उपलब्ध होगा, जबकि उज्ज्वला लाभार्थियों को 16 दिन का इंतजार करना पड़ेगा।
कंपोजिट सिलिंडर की बात करें तो 10 किलो वाले सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्रों में 18 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 32 दिन का अंतराल तय किया गया है। यह बदलाव खासतौर पर उन इलाकों में असर डाल सकता है जहां गैस की आपूर्ति पहले से ही सीमित है।
तेल कंपनियों ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में भी बदलाव किया है। अब यदि कोई उपभोक्ता तय समय से पहले गैस बुक करने की कोशिश करता है तो सिस्टम स्वतः उसकी बुकिंग को ब्लॉक कर देगा। इससे जमाखोरी और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
दो सिलिंडर कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए नियम और सख्त कर दिए गए हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अब दूसरे सिलिंडर की बुकिंग के लिए कम से कम 35 दिन का इंतजार करना होगा। वहीं, एक सिलिंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन की सीमा लागू रहेगी। इस फैसले से उन लोगों पर सीधा असर पड़ेगा जो अतिरिक्त सिलिंडर के जरिए स्टॉक बनाए रखते थे।
गैस किल्लत को देखते हुए प्रशासन भी सख्त हो गया है। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर अब नई सीमा तय कर दी गई है, जिसमें आवश्यक सेवाओं और सामान्य व्यवसायों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। अस्पताल, रेलवे और शैक्षणिक संस्थानों जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को उनके पिछले तीन महीनों के औसत उपभोग का 20 प्रतिशत सिलिंडर दिया जाएगा, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति ही मिल सकेगी।
प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूर्ति विभाग को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक ही गैस पहुंच सके।
इस पूरी नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं की दिनचर्या पर पड़ सकता है। जहां एक ओर सरकार और कंपनियां पारदर्शिता और नियंत्रण की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को अब गैस के इस्तेमाल में पहले से ज्यादा योजना बनाकर चलना होगा, क्योंकि तय समय से पहले सिलिंडर मिलना अब संभव नहीं होगा।
