अल्मोड़ा । सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान में शिक्षकों की भारी कमी के कारण मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कॉलेज में कुल 178 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 118 पद वर्तमान में रिक्त हैं और केवल 60 पदों पर ही नियुक्ति हो पाई है।
फैकल्टी की इस कमी का सीधा असर एमबीबीएस और पीजी कोर्स में पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ रहा है। पर्याप्त शिक्षक न होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका शैक्षणिक स्तर प्रभावित हो रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि कई छात्र इस कॉलेज में प्रवेश लेने के बजाय अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों का रुख कर रहे हैं। खासतौर पर पीजी कोर्स में दाखिले के लिए यहां छात्रों की रुचि कम होती जा रही है।
एनाटॉमी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी चिंता का विषय रही है। अब यह समस्या और गहरा गई है, जिससे चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन योग्य शिक्षकों की नियुक्ति उसी गति से नहीं हो पा रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरना जरूरी है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके और संस्थान की साख बनी रहे।
