नई दिल्ली: हज 2026 के लिए रवाना हो रहे तीर्थयात्रियों के बीच इस बार एक खास बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहाँ ने जानकारी दी कि 44 महिला तीर्थयात्री बिना महरम (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा के लिए रवाना हुई हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ एक प्रशासनिक सूचना है, बल्कि समाज में बदलती सोच और महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता का संकेत भी देता है।
एएनआई से बातचीत में कौसर जहाँ ने इन सभी महिला यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी सुरक्षित और सुगम यात्रा की कामना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिना महरम के हज पर जाने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी और स्वतंत्र हो रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
दरअसल, हाल के वर्षों में नीतिगत स्तर पर हुए बदलावों ने इस परिवर्तन को गति दी है। अब मुस्लिम महिलाओं को बिना किसी पुरुष अभिभावक के हज यात्रा करने की अनुमति दी गई है, जिससे उनकी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह निर्णय सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे महिलाओं को अपने धार्मिक कर्तव्यों को स्वतंत्र रूप से निभाने का अवसर मिल रहा है।
इस्लाम में हज को पाँच अनिवार्य स्तंभों में से एक माना जाता है, जिसे हर सक्षम मुस्लिम को जीवन में कम से कम एक बार पूरा करना चाहिए। इसके अलावा शहादा (ईमान की घोषणा), सलात (नमाज़), ज़कात (दान) और सौम (रमज़ान के रोज़े) भी इस धर्म के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
इससे पहले 18 अप्रैल को हज 2026 का पहला जत्था भी नई दिल्ली से रवाना हुआ था, जिसमें 371 तीर्थयात्री शामिल थे। यह उड़ान इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से सऊदी अरब के लिए रवाना हुई, जिसके साथ ही भारत से इस वर्ष की हज यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई। उस अवसर पर भी कौसर जहाँ ने सभी यात्रियों को बधाई दी और उनकी यात्रा को सफल व सुरक्षित बनाने की कामना की।कुल मिलाकर, इस बार की हज यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण और बदलते सामाजिक परिदृश्य की भी एक मजबूत झलक पेश कर रही है।
