देहरादून: नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीब करौरी महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए प्रशासन दर्शन के लिए पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। चारधाम यात्रा की तर्ज पर यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत कैंची धाम की धारण क्षमता का आकलन किया जाएगा, ताकि प्रतिदिन दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित की जा सके। इस संबंध में जिला प्रशासन और शासन के बीच जल्द बैठक होने की संभावना है। बैठक में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के बाद पंजीकरण व्यवस्था और श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
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पिछले कुछ समय से कैंची धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। खासकर सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। इसके चलते भवाली से अल्मोड़ा जाने वाले मार्ग पर भी जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ इस मार्ग से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दो अक्तूबर को कैंची धाम में एक ही दिन में करीब 35 हजार वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई थी। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने से क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी बढ़ गया। कैंची धाम तक पहुंचने वाला भवाली-अल्मोड़ा मार्ग कई स्थानों पर सिंगल लेन है। इसके अलावा सड़क पर तीखे मोड़ होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी वाहनों से धाम पहुंचते हैं, तो जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है। इसका असर स्थानीय लोगों की दैनिक आवाजाही पर भी पड़ता है।
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चारधाम यात्रा की तर्ज पर बन सकती है व्यवस्था
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन चारधाम यात्रा में लागू पंजीकरण व्यवस्था के अनुभवों को भी ध्यान में रख रहा है। चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद यात्रा मार्गों पर वाहनों की अधिक संख्या और सीमित पार्किंग क्षमता के कारण कई स्थानों पर जाम की समस्या बनी रहती है। कैंची धाम में भी पंजीकरण व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं की संख्या का पूर्व आकलन करना और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार दर्शन की व्यवस्था को बेहतर बनाना हो सकता है।
चारधाम यात्रा के दौरान अब तक पंजीकरण का आंकड़ा 71.72 लाख तक पहुंच चुका है। इनमें से 57.64 लाख श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, पंजीकरण व्यवस्था होने के बावजूद यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। केदारनाथ यात्रा के दौरान सोनप्रयाग में पार्किंग की कमी और सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक शटल सेवा के लिए लगने वाली लंबी कतारें इसकी प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।
स्थानीय लोगों को जाम से राहत दिलाने पर भी जोर
कैंची धाम में प्रस्तावित पंजीकरण व्यवस्था के साथ ही यातायात प्रबंधन भी प्रशासन के लिए अहम मुद्दा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ने से स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित करने के साथ-साथ वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना भी जरूरी माना जा रहा है।
जिला प्रशासन और शासन के बीच होने वाली प्रस्तावित बैठक में धाम की क्षमता और श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद ही पंजीकरण व्यवस्था लागू करने और प्रतिदिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित करने के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन का प्रयास है कि कैंची धाम में श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ यातायात की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सके।

