कानपुर : रविवार रात की वह भयावह घटना पूरे गांव की नींद और चैन दोनों छीन ले गई। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक एक मां अपने ढाई साल के बेटे को सुलाने की कोशिश कर रही थी और अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए सपने बुन रही थी, उसी घर में थोड़ी ही देर बाद खून पसरा हुआ था और सन्नाटा चीखों से भारी हो चुका था।
रूबी देवी हमेशा चाहती थी कि उसका पति शराब छोड़ दे, घर संभाले और बच्चों का भविष्य संवारे। लेकिन उसकी यही चिंता उस रात उसकी आखिरी आवाज बन गई। नशे में धुत सुरेंद्र ने पत्नी के विरोध को अपना अपमान समझ लिया और गुस्से में वह हैवान बन गया। मां की गोद में बैठा मासूम लवांश, जिसे शायद समझ भी नहीं था कि उसके घर में क्या हो रहा है, अपने पिता की दरिंदगी का शिकार बन गया।
गांव वालों का कहना है कि रूबी शांत स्वभाव की थी, हर मुश्किल में भी मुस्कराने की कोशिश करती थी। वह अपने होने वाले बच्चे के लिए छोटे-छोटे कपड़े सिल रही थी और लवांश को स्कूल भेजने के सपने देख रही थी। लेकिन एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।
उस रात न सिर्फ दो जिंदगियां गईं, बल्कि एक परिवार की पूरी दुनिया उजड़ गई। घर के बाहर जमा लोगों की आंखों में आंसू थे और दिल में सवाल—क्या नशे की आदत इंसान से इंसानियत तक छीन लेती है?आज वह आंगन सूना है, जहां कभी बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं। रूबी का अधूरा सपना और लवांश की मासूम हंसी हमेशा के लिए उस घर की दीवारों में कैद हो गई है
