
स्वयं को पुनर्जीवित करने के लिए कांग्रेस अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कश्मीर से कन्याकुमारी तक 145 दिन की यात्रा पर निकली है और इसे नाम दिया है, भारत जोड़ो यात्रा। विडम्बना यहीं से प्रारंभ होती है– उद्देश्य है दिन प्रतिदिन बिखरती कांग्रेस को कुछ संजीवनी देना और इसी बहाने एक बार फिर राहुल को लांच करना और नाम है भारत जोड़ो जबकि होना चाहिए था कांग्रेस जोड़ो। “कांग्रेस को भारत से जोड़ो” नारा होता तो भी बात बन जाती।
कांग्रेस पार्टी की यह यात्रा कहाँ, क्या और कितना जोड़ पाएगी यह तो समय बतायेगा लेकिन पिछले पांच दिनों में इस यात्रा ने कांग्रेस का असली चरित्र अवश्य बेनकाब किया है। राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पूरी तरह एक हिंदू और सनातन संस्कृति विरोधी पार्टी बन चुकी है इसमें टुकड़े-टुकड़े गैंग तथा हम लेकर रहेंगे आजादी के नारे लगाने वाले लोगों की भर्ती हो चुकी है। आन्दोलन जीवी भी इसमें स्थान पा रहे हैं। राहुल गांधी इस यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समाप्त करने का दिवास्वप्न भी देख रहे हैं।
भारत जोड़ो का नारा देकर यात्रा पर निकले राहुल गांधी की कांग्रेस ट्वीट करके संघ को 145 दिन में जलाकर भस्म करने की भविष्यवाणी कर रही है। राहुल गांधी संभवतः यह भूल गए हैं कि स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सहित तमाम सेकुलर नेता संघ को समाप्त करने का सपना देखते रहे किंतु स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और राष्ट्रवादी विचारधारा के बल पर संघ आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है जो राहुल गांधी की 145 दिन की यात्रा के समापन के बाद भी वैसे ही खड़ा रहेगा।
संघ-भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद उस समय गहरा गया जब भारत जोड़ो यात्रा के पांचवें दिन कांग्रेस ने एक फोटो ट्वीट किया और लिखा, ”भारत को नफरत की जंज़ीरों से मुक्त कराने और भाजपा-संघ द्वारा किये गये नुकसान की भरपाई के लिए हम एक-एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। आगे लिखा, “145 दिन और” साथ लगाए गए फोटो में संघ के गणवेष में आग लगी हुई है और उसमें से धुआं उठ रहा है। यद्यपि अब निकर संघ का गणवेश नहीं रहा किन्तु कांग्रेस की मंशा स्पष्ट हो गयी है।
राहुल गांधी के केरल में प्रवेश करते ही कांग्रेस ने संघ पर आपत्तिजनक ट्वीट किया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसके माध्यम से राहुल और कांग्रेस केरल के कट्टरपंथी मुसलमानों को खुश करना चाहते हैं। दरअसल ऐसा करके राहुल नेहरू जी के पदचिन्हों का ही अनुसरण कर रहे हैं। नेहरू जी ने भी आजादी के ठीक बाद दक्षिण भारत में संघ को दबाने और मुस्लिम लीग को आगे बढ़ाने का काम किया था। नेहरू ने तत्कालीन मद्रास प्रांत जिसमें वर्तमान तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक और केरल आता था, की सरकार पर ये दबाव बनाया था कि वो संघ पर प्रतिबंध लगाये वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम लीग को खुली छूट दी जाए।
आजादी के ठीक छह महीने बाद से ही नेहरू जी ने संघ को समाप्त करने के षड्यंत्र करने प्रारंभ कर दिए थे। आज उन्हीं के परनाती राहुल गांधी 145 दिन बाद संघ को समाप्त करने का सपना देख रहे हैं। राहुल गांधी की कांग्रेस ने जिस प्रकार से खाकी निकर पर आग लगाई है वैसी आग तो कांग्रेस वास्तव में लगाती रही है जिसमें 1984 के सिख दंगों से लेकर, बिहार का भागलपुर दंगा, उप्र का मेरठ दंगा सहित तमाम ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जिनसे पता चलता है कि कांग्रेस कितनी अधिक नफरतों से भरी पड़ी हुई है। देश में नफरत का जो भी बचा खुचा व्यापार है वह पूरा का पूरा कांग्रेस के गांधी परिवार के नेतृत्व में ही चल रहा है जिसमें सिर तन से जुदा अभियान भी शामिल है।