शामली : जिले में सामने आई एक पारिवारिक त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कांधला क्षेत्र के एक गांव में पांच दिनों से लापता महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियों की तलाश उस वक्त खत्म हुई, जब पुलिस जांच में मामला तिहरे हत्याकांड में तब्दील हो गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि तीनों की हत्या घर के भीतर ही की गई और फिर सबूत मिटाने के इरादे से शवों को आंगन में दफना दिया गया। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसके बयानों में लगातार विरोधाभास सामने आए तो सख्त पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आंगन की खुदाई कर शव बरामद करने की प्रक्रिया शुरू की।
घटना की जानकारी फैलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण आरोपी के घर के बाहर जमा हो गए। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। देर रात जब आरोपी को थाने ले जाया जा रहा था, तब मृतका के मायके पक्ष के लोगों ने आक्रोश जताते हुए पुलिस वाहन को घेर लिया और आरोपी पर हमला करने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
जांच में यह भी सामने आया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव को लेकर अक्सर झगड़े होते थे। इसी दौरान पत्नी का बिना पारंपरिक परिधान के मायके जाना आरोपी के लिए ‘इज्जत का सवाल’ बन गया, जिसने इस खौफनाक वारदात को जन्म दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने अपनी सोच और तथाकथित सामाजिक दबाव को हत्या का कारण बताया है।
मृतका के परिजनों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए आशंका जताई है कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। उनका कहना है कि शवों को दफनाने जैसी प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति के लिए आसान नहीं होती। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है और कहा है कि हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर घरेलू हिंसा, पितृसत्तात्मक सोच और ‘इज्जत’ के नाम पर होने वाले अपराधों की भयावह तस्वीर सामने लाती है। तीन जिंदगियों का इस तरह खत्म होना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जिस पर आत्ममंथन की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
