पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक विवाद और गहराता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के आरोपों का खुला समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मेमन का कहना है कि बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियाँ देश के अन्य राज्यों से भिन्न हैं, जहाँ मतदाता अत्यंत सजग और प्रतिबद्ध हैं। यही कारण है कि भाजपा अब तक राज्य में सत्ता हासिल करने में असफल रही है।
मजीद मेमन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पिछले कुछ वर्षों से अपने संवैधानिक दायित्वों से भटकता नजर आ रहा है। उनके अनुसार, हालिया चुनावों में आयोग की भूमिका संदेह के घेरे में रही है और यह धारणा मजबूत हुई है कि वह केंद्र की मौजूदा सरकार के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आयोग वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे सभी प्रक्रियाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करना चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में चुनाव आयोग से मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर सहित करीब दस अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिससे लाखों मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे पर भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी ईवीएम में नहीं, बल्कि मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम में की जा रही है। बनर्जी का दावा है कि 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग के दावे सही हैं, तो उसे 1.36 करोड़ कथित “तार्किक विसंगतियों” की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितनी भी एजेंसियों का सहारा ले ले—चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई, अर्धसैनिक बल, न्यायपालिका या मीडिया—जनता तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ी है। उन्होंने विपक्षी दलों से भी एकजुट होने की अपील की और कहा कि यदि समय रहते सभी दल इस मुद्दे को गंभीरता से लेते, तो भाजपा को देशभर में नुकसान उठाना पड़ता।फिलहाल, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन को लेकर सियासी माहौल बेहद गर्म है और आने वाले दिनों में यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर और तेज होने के संकेत दे रहा है।
