देहरादून : सेतु आयोग तथा शहरी विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से स्वच्छ उत्तराखंड मिशन वर्ष 2026 से लेकर 2030 की अवधि का एक समग्र (होलिस्टिक) ठोस कचरा प्रबंधन प्लान लगभग तैयार कर चुका है। इस सम्बन्ध में बीते मंगलवार को देहरादून में एक एक्सपर्ट गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सेतु आयोग उत्तराखण्ड के माननीय उपाध्यक्ष श्री राजशेखर जोशी, शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक श्री प्रवीण कुमार तथा शहरी विकास विभाग के अधीक्षण अभियन्ता श्री रवि पाण्डे द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
इस बैठक में देशभर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लियाए खासकर हिमालयी राज्यों जैसे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के साथण्साथ महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों से भी प्रतिनिधि शामिल हुए।इस कार्यक्रम में शहरी विकास विभागए उत्तराखंड और मुंबई के नगर निकाय प्रतिनिधिए इंडस्ट्री विशेषज्ञए सामाजिक संस्थाओंए नवाचार मॉडल्स के संगठनों ने प्रतिभाग किया। इस संवाद में SWM Rule 2026 के नए प्रावधानों पर खास ध्यान दिया गया, जिसमें चार तरह से कचरा अलग करना, डिजिटल तकनीकों और लैंडफिल पर नियम शामिल हैं। वर्तमान में उत्तराखंड में करीब 1900-2000 टन प्रतिदिन कचरा उत्पन्न होता है। घर-घर से कचरा संग्रहण में सुधार हुआ है, पर अभी भी स्रोत पर कचरा अलग करने की, प्रोसेसिंग पर बहुत कार्य की आवश्यकता है।
सेतु आयोग के माननीय उपाध्यक्ष श्री राजशेखर जोशी ने मुख्य सम्बोधन में कहा:अगर हमें सच में स्वच्छ उत्तराखंड बनाना है तो हमें मिशन मोड में समग्र रूप से काम करना होगा। हमारा लक्ष्य लैंडफिल को खत्म करके जीरो-लैंडफिल की दिशा में बढ़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन के लिए चार संगठन जिम्मेदार हैं—राज्य सरकार, नागरिक समाज, निजी कंपनियां और शहरी स्थानीय निकाय, इसके लिए संसाधनों का सही उपयोग, पर्वतीय क्षेत्र में अधिक स्थानीय प्रोसेसिंग, स्थानीय निकाय और PPP मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बहुत जरूरी है। एक्शन प्लान में रोजगार सृजन और वर्तमान सफाई कर्मचारियों के कौशल और सम्मान की वृद्धि का मॉडल है ”उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल निगरानी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल बेहतर योजना बनाने, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, सेवा वितरण को सुदृढ़ करने और पूरे सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए करना होगा।
इसके तहत डिजिटल ट्रैकिंग, GPS से जुड़े कचरा वाहन और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली जैसे उपाय प्रस्तावित एक्शन प्लान का हिस्सा होंगे।इस कार्यक्रम में चार विषयों पर पैनल चर्चा हुईं, जिनमें “वेस्ट टू वेल्थ”, टेक्नोलॉजी का उपयोग, कम्युनिटी की भागीदारी और कचरा प्रबंधन की निगरानी व गवर्नेंस जैसे विषय शामिल थे। शहरी विकास विभाग और सेतु आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और सलाहकार, सेतु आयोग SETU की और कई संस्थाओं जैसे Healing Himalayas, Recykel, Feedback Foundation, Waste Warriors, Him village Eprahari के प्रतिनिधि तथा निकायों के अधिशासी अधिकारी आदि शामिल हुए।
