हरिद्वार: बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अद्भुत और विशाल सैलाब उमड़ पड़ा, जहां भोर की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं का जनसमूह गंगा तट की ओर बढ़ता दिखाई दिया। हर की पौड़ी और आसपास के प्रमुख घाटों पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम देखने को मिला, मानो पूरा वातावरण ही भक्तिमय हो उठा हो। देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पहुंचे श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घंटों पहले से कतारों में खड़े नजर आए। हर कोई इस पावन दिन गंगा में डुबकी लगाकर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करता दिखा।
सुबह के समय हर की पौड़ी पर गंगा आरती के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ और भी बढ़ गई। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “बुद्धं शरणं गच्छामि” के जयघोष एक साथ गूंजते रहे, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालु फूल-मालाएं, दीप और प्रसाद अर्पित करते हुए गंगा मैया के प्रति अपनी आस्था व्यक्त कर रहे थे। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे थे, तो कई साधु-संत भी इस अवसर पर विशेष रूप से हरिद्वार पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।
भीड़ के इस विशाल स्वरूप को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए हर प्रमुख घाट और मार्ग पर पुलिस बल, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई थी। आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन कैमरों के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही थी, जिससे किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके। इसके अलावा सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे भी अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए थे, जिनके जरिए कंट्रोल रूम से स्थिति पर नजर रखी जा रही थी।
भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। घाटों पर बैरिकेडिंग कर अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए थे, ताकि भीड़ का दबाव एक ही दिशा में न बढ़े। ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए शहर के कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया था। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर के बाहरी क्षेत्रों में ही पार्क कराया जा रहा था, जिससे शहर के भीतर जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मौके पर तैनात रहीं, ताकि किसी श्रद्धालु को अस्वस्थता होने पर तत्काल उपचार मिल सके। एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया था। सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीमों द्वारा लगातार घाटों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया जा रहा था, जिससे पवित्र गंगा घाटों की स्वच्छता बनी रहे।
स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने, खोया-पाया केंद्रों के माध्यम से बिछड़े लोगों को मिलाने और आपात स्थिति में सहायता प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई थी। लाउडस्पीकर के माध्यम से समय-समय पर श्रद्धालुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे, जिससे वे सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से अपने धार्मिक कृत्यों को पूरा कर सकें।
बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर हरिद्वार में उमड़ी आस्था की यह भीड़ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती नजर आई, जहां श्रद्धा, अनुशासन और सामूहिक सहयोग के साथ एक विशाल आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
