नई दिल्ली: राजधानी में नवजात शिशुओं की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय था और इस दौरान विभिन्न राज्यों में लगभग 30 नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त कर चुका था। पुलिस के अनुसार, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मजबूरियों का फायदा उठाकर बच्चों को बेहद कम कीमत पर खरीदता और फिर लाखों रुपये में बेच देता था।
जांच में खुलासा हुआ है कि राजस्थान और गुजरात के आदिवासी तथा पिछड़े क्षेत्रों सहित कई जगहों से नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को 10,000 से 20,000 रुपये में खरीदा जाता था। इसके बाद जाली जन्म प्रमाणपत्र और चिकित्सा दस्तावेज तैयार कर उन्हें दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में संतान की चाह रखने वाले दंपतियों को 6 लाख से 10 लाख रुपये तक में बेचा जाता था।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कथित तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और एक अस्पताल संचालक भी शामिल है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसके तार अन्य लोगों से भी जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस की जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। बचाए गए बच्चों को फिलहाल सुरक्षित संरक्षण और देखरेख में रखा गया है। इस घटना ने एक बार फिर देश में मानव तस्करी और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
