अयोध्या : राम मंदिर दानपात्र से धन की कथित चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर दबाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हैं, हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं। सभी आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया।
दानपात्र से धन गायब होने का मामला 6 जून को सामने आया था। ट्रस्ट की मांग पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को गृह विभाग को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने सहित कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई थीं।
इसी के आधार पर राम जन्मभूमि थाने में टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों से रातभर चली पूछताछ के दौरान बड़ी नकदी बरामद हुई।
जांच एजेंसियां अब ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के करीबी या रिश्तेदार हैं, जिसके चलते मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि दो ट्रस्टियों पर आरोप लगे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले में ट्रस्टी कृष्ण मोहन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में आरोपियों के पिता के नाम, पते और गणना कार्य में लगे कर्मचारियों का पूरा विवरण न होने पर भी चर्चा हो रही है।
इसी बीच मंदिर निर्माण से जुड़े सहायक गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि वे ट्रस्ट के पदाधिकारी या सदस्य नहीं हैं, लेकिन मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी सक्रियता चर्चा का विषय रही है। फिलहाल उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि एसआईटी की जांच पूरी होने से पहले कोई बयान देना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार अभी केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है और जांच की प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। आमतौर पर बड़ी गिरफ्तारी के बाद विस्तृत प्रेस नोट जारी किया जाता है, लेकिन इस बार पुलिस ने सीमित जानकारी ही साझा की। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने केवल इतना कहा कि सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जांच जारी है और उल्लेखनीय रकम बरामद हुई है।
सूत्रों के मुताबिक जांच का दायरा अब बैंकिंग व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। दो बैंक अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस उनके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है। इसी आधार पर मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
फिलहाल एसआईटी और पुलिस की जांच जारी है तथा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
