मुजफ्फरपुर : मुरौल प्रखंड के रैनी गांव में महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और सर्वोदय आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की 131वीं जयंती श्रद्धा, स्मृति और उनके विचारों के आलोक में मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आचार्य विनोबा भावे के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्यकुलम के जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार **डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’** ने कहा कि आचार्य विनोबा भावे करुणा, त्याग, अहिंसा और मानवता के साक्षात् प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, समानता और सम्मान पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। विनोबा भावे ने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से समाज को सेवा, समता, सद्भाव और भाईचारे का मार्ग दिखाया।
डॉ. विजय कुमार पाठक ने कहा कि विनोबा भावे का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती असमानता, स्वार्थ और सामाजिक दूरी के बीच विनोबा भावे के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर ही एक संवेदनशील, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आचार्य विनोबा भावे ने भूदान आंदोलन के माध्यम से समाज के संपन्न वर्ग को अपनी जमीन का एक हिस्सा भूमिहीन और जरूरतमंद लोगों के लिए देने के लिए प्रेरित किया था। उनका मानना था कि समाज में संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण और आपसी सहयोग ही वास्तविक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकता है। उन्होंने अहिंसा और सर्वोदय के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विनोबा भावे का जीवन सादगी, त्याग और सेवा की मिसाल रहा। उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के कल्याण को प्राथमिकता दी। उनके विचारों में मानव मात्र के प्रति प्रेम, सम्मान और समानता का भाव दिखाई देता है। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।
सभा में उपस्थित लोगों ने विनोबा भावे के जीवन, उनके सामाजिक योगदान और सर्वोदय के विचारों पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि गांवों के विकास, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। विनोबा भावे का सपना ऐसे समाज का था, जहां किसी व्यक्ति को अभाव और भेदभाव का सामना न करना पड़े।
इस अवसर पर समाजसेवी विनोद कुमार पाठक, किशोर कुमार पाठक, कुणाल कुमार, कुमकुम देवी, उदय ठाकुर, विशाल कुमार पाठक एवं हर्षित राज सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी ने आचार्य विनोबा भावे के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा उनके बताए सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन विनोबा भावे के आदर्शों को याद करते हुए किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि उनके विचार और जीवन दर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सामाजिक सेवा, मानवता और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
रिपोर्ट -कुमार संदीप
