देहरादून : उत्तराखंड में फिल्म निर्माण और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद पहली बार राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कार आयोजित करने जा रही है। इन पुरस्कारों के जरिए प्रदेश में निर्मित और फिल्मांकित फिल्मों के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म विधा से जुड़े रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशानिर्देश पर प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने तथा उत्तराखंड को प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद लगातार प्रयास कर रही है।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, नदियां, झीलें, जंगल और धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे हैं। वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक राज्य में 1440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं। फिल्म निर्माण से प्रदेश में होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्थानीय सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
52 फिल्मों को दिया जा चुका अनुदान
वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक प्रदेश में 52 फिल्मों को अनुदान दिया गया है। इनमें हिंदी फिल्मों के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और अन्य उत्तराखंडी भाषाओं में बनी फिल्में भी शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में ही 25 फिल्मों को अनुदान प्रदान किया गया।
16 अक्टूबर तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन
राज्य की फिल्म नीति के तहत पहली बार उत्तराखंड फिल्म पुरस्कारों का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2024 और 2025 में उत्तराखंड में निर्मित या फिल्मांकित फिल्मों को पुरस्कारों के लिए शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राज्य की क्षेत्रीय बोलियों, हिंदी और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भारतीय भाषाओं में बनी फिल्मों को भी सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कारों के तहत उत्कृष्ट कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म विधा से जुड़े अन्य रचनात्मक व्यक्तियों को भी सम्मान दिया जाएगा। इच्छुक आवेदक 15 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 तक उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की वेबसाइट ufdc.uk.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के सीईओ बंशीधर तिवारी ने कहा कि फिल्म पुरस्कारों का पहला आयोजन स्थानीय फिल्मों, भाषाओं, कलाकारों और तकनीकी प्रतिभाओं को सम्मान और पहचान देने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं और लोक संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
