
अल्मोड़ा/रानीखेत। भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से रानीखेत-अल्मोड़ा हाईवे पर स्थित मजखाली क्षेत्र में शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग आधा हिस्सा ध्वस्त हो गया। यह हाईवे पहले ही बार-बार बंद होने के कारण दबाव झेल रहा था, और अब स्थिति और गंभीर हो गई है।
स्थानीय निवासियों पवन अधिकारी और भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से सड़क पर दरारें दिखाई दे रही थीं। शुक्रवार सुबह हुई भारी बारिश के बाद भूस्खलन और भू-धंसाव में वृद्धि हुई और देखते ही देखते सड़क का बड़ा हिस्सा गिर गया। हाईवे का यह भाग पूरी तरह असुरक्षित हो गया है, जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों और यात्रियों के लिए खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। राजमार्ग पर दरारें लगातार चौड़ी हो रही हैं, जो आने-जाने वाले वाहनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रही हैं।
साथ ही, खैरना–रानीखेत स्टेट हाईवे पर भी खतरा मंडरा रहा है। कनवाड़ी और उपराड़ी की पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। बरसात का पानी पहाड़ियों में रिसने से दरारें और गहरी हो रही हैं। स्थानीय निवासी रमेश खनायत, गौरव बेलवाल और सौरव सिंह का कहना है कि रोजाना सड़क पर पत्थरों के गिरने का डर बना रहता है। बावजूद इसके विभागीय स्तर पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए दीवार और जाल लगाने की मांग की है।
इसी बीच, घिंघारीखाल क्षेत्र में शुक्रवार को एक विशालकाय चीड़ का पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया। गनीमत रही कि उस समय कोई वाहन वहां से गुजर नहीं रहा था। हालांकि बाद में वहां से गुजरने वाले वाहन फंस गए और कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया। स्थानीय लोगों और विभागीय टीम की मदद से पेड़ को हटाया गया और उसके बाद यातायात सामान्य हुआ।
स्थानीय लोग लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बारिश के मौसम में बड़े-बड़े पेड़ों के गिरने और पहाड़ी दरारों के कारण सड़क मार्गों पर गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन से आवश्यक सुरक्षा उपायों को तत्काल लागू करने की मांग की जा रही है, ताकि किसी बड़ा हादसा होने से रोका जा सके।