नई दिल्ली : विजय दिवस के पावन अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन परिसर में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया। यह दीर्घा भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित 21 वीर योद्धाओं की वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। गैलरी में सभी परम वीर चक्र विजेताओं के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो देश की रक्षा में उनके अदम्य संकल्प और शौर्य की कहानी कहते हैं।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, परम वीर दीर्घा का उद्देश्य देश और विदेश से आने वाले आगंतुकों को भारत के उन महान राष्ट्रीय नायकों से परिचित कराना है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया और कई मामलों में अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह दीर्घा न केवल स्मरण का स्थल है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
औपनिवेशिक विरासत से राष्ट्रीय गौरव की ओर कदम
विशेष बात यह है कि जिन गलियारों में अब परम वीर दीर्घा स्थापित की गई है, वहां पहले ब्रिटिश काल के सहायक अधिकारियों के चित्र लगाए गए थे। इनकी जगह भारतीय सैन्य नायकों के चित्रों का स्थापित होना औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर भारत की स्वाभिमानी परंपरा, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य अलंकरण है, जो युद्ध के दौरान दुश्मन के सामने असाधारण साहस, नेतृत्व क्षमता और सर्वोच्च आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान से सम्मानित योद्धा भारतीय सैन्य इतिहास के स्वर्णिम अध्याय का हिस्सा हैं।
भारतीय सेना ने भी साझा की विजय दिवस की गौरवगाथा
विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना ने भी 1971 के भारत–पाक युद्ध में सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य को याद किया। सेना के सूचना महानिदेशालय द्वारा जारी सोशल मीडिया पोस्ट में 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति की ऐतिहासिक गाथा साझा की गई।
भारतीय सेना ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि विजय दिवस केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक और ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है। पोस्ट में कहा गया कि मुक्ति वाहिनी और भारतीय सेना ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया, जिससे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक गति मिली।
1971 की जीत जिसने इतिहास बदल दिया
भारतीय सेना ने अपने संदेश में कहा कि 1971 की यह विजय भारत के सैन्य इतिहास को नया स्वरूप देने वाली थी। इस युद्ध ने न केवल दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र को बदल दिया, बल्कि बांग्लादेश नामक एक नए स्वतंत्र राष्ट्र को जन्म दिया। 16 दिसंबर 1971 को हासिल की गई इस निर्णायक जीत की स्मृति में हर वर्ष विजय दिवस मनाया जाता है।परम वीर दीर्घा का उद्घाटन इसी ऐतिहासिक परंपरा और बलिदान को सम्मान देने की दिशा में एक स्थायी स्मारक के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, साहस और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देता रहेगा।
