देहरादून। उत्तराखंड में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में साइबर ठगों ने 468 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। इस अवधि में करीब 90 हजार लोग साइबर अपराध का शिकार हुए हैं। हालांकि, सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाने में सफलता हासिल की है।
आंकड़ों के मुताबिक बीते पांच वर्षों में साइबर ठगी के मामलों में 12 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। हर साल ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में सबसे खतरनाक ट्रेंड “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर ठगी करने का सामने आया है।
पांच सालों में डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 37 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया, जिनसे करोड़ों रुपये ऐंठे गए। पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से कॉलरट्यून, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ठग अपने तरीके बदलकर लोगों को फंसाने में लगे हुए हैं।
पांच साल के आंकड़े (2021–2025):
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2021: 4492 शिकायतें, 15 करोड़ की ठगी, 1.21 करोड़ रुपये बचाए
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2022: 11169 शिकायतें, 40 करोड़ की ठगी, 2.45 करोड़ रुपये बचाए
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2023: 18020 शिकायतें, 69 करोड़ की ठगी, 7.41 करोड़ रुपये बचाए
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2024: 23801 शिकायतें, 167 करोड़ की ठगी, 30.17 करोड़ रुपये बचाए
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2025: 31870 शिकायतें, 177.81 करोड़ की ठगी, 28.59 करोड़ रुपये बचाए
पिछले वर्ष सबसे ज्यादा ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले सामने आए। पुलिस का कहना है कि जनजागरूकता और त्वरित कार्रवाई के चलते ही पिछले साल 28 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई जा सकी। भविष्य में साइबर अपराध से निपटने के लिए संसाधन और बढ़ाए जाएंगे।
